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सचिन तेंदुलकर की जीवनी: जीवन, बचपन, कैरियर, रिकॉर्ड और पदक

  सचिन तेंदुलकर की जीवनी: जीवन, बचपन, कैरियर, रिकॉर्ड और पदक



परिचय:-

सचिन तेंदुलकर की जीवनी: जीवन, बचपन, कैरियर, रिकॉर्ड और पदक
सचिन तेंदुलकर की जीवनी
             सचिन क्रिकेट के भगवान के रूप में एक लोकप्रिय नाम हैं और अपने स्कोर, रिकॉर्ड और विनम्रता के लिए प्रसिद्ध हैं, वे अपने क्रिकेट करियर में बहुत प्रसिद्ध  हैं  जब कभी भी सचिन आउट होते थे तब बहुत से लोग मैच देखना बंद कर देते थे । क्योंकि उन्हें सारी  आशाएं सचिन से ही थी

                  वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने ने क्रिकेट को बहुत ऊपर तक पहुँचाया और  इन्हीं  की वजह से आज क्रिकेट इतना लोकप्रिय खेल बन चूका  है  और सचिन के प्रवेश से भारतीय क्रिकेट टीम को एक रत्न मिला। जिसने क्रिकेट की खेल को बहुत ऊँचे स्थान पर पहुंचा दिया।

       तेंदुलकर के प्रवेश से पहले भारतीय टीम का  प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं था, लेकिन सचिन ने क्रिकेट के इतिहास को बदल दिया और भारतीय टीम को विश्व में उच्च पहचान दिलाया। वह क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने क्रिकेट के खेल में बहुत से पदक और रत्न जीते। वह भारत के पहले क्रिकेटर हैं जिन्हें भारत रत्न पुरस्कार और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार मिला है।

  वह समाज से जुड़े हुए व्यक्ति हैं जो की एक गैर सरकारी संगठन को भी चलाते हैं यह संघठन २०० बच्चो की पालन पोषण करता है  तो यह थी एक सचिन तेंदुलकर की छोटी सी जीवन कथा और चलिए अब हम इसे और विस्तृत रूप में देखे।


                                                             सामग्री



1., सचिन तेंदुलकर का जन्म स्थान
2., लड़कपन
3., करियर
4., रिकॉर्ड
5., पदक 


सचिन तेंदुलकर का जन्म स्थान: - 

                                    सचिन रमेश तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल 1973 को राजपुर, बॉम्बे में मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में हुआ है। उनके पिता का नाम रमेश तेंदुलकर है जो एक लेखक और प्रोफेसर थे ।

               और उनकी मां का नाम रजनी तेंदुलकर था, जिन्होंने एक बीमा कंपनी में काम किया था। सचिन अपने पिता की दूसरी पत्नी के बेटे है। उनकी पहली पत्नी से तीन बच्चे अजय, नितिन और सविता हैं।


            सचिन  तेंदुलकर का नाम उनके पिता के पसंदीदा गायक सचिन देव बर्मन पर रखा गया है। सचिन बचपन से ही शरारती थे , वे कम उम्र में ही क्रिकेट से प्यार करते थे और वह हमेशा अपने स्कूल के साथियों से झगड़ते थे।   

   लड़कपन: -   

सचिन तेंदुलकर की जीवनी: जीवन, बचपन, कैरियर, रिकॉर्ड और पदक
सचिन तेंदुलकर की जीवनी
                                         अब सचिन बड़े होते हैं और जैसे जैसे वह बड़े होते हैं उसी प्रकार उनकी शरारते भी बढ़ती जाती हैं यह सब देखते हुए उनके बड़े भाई  ने उनकी शरारतो को कम करने के लिए उन्हें 1984 में दिल्ली क्रिकेट अकादमी मैं भर्ती करवा दिया 

                        सचिन के भाई उनके प्रशिक्षण के लिए उन्हें रमाकांत अचरेकर के पास लेकर जाते हैं वह उस समय के सबसे अच्छे और प्रसिद्ध कोच थे उन्होंने ने साफ़ तौर पर कह दिया की पहले मैं इसे खेलता हुआ देखूंगा फिर बताऊंगा की मैं इससे प्रशिक्षण दूंगा की नहीं। जब सब सचिन को खेलता देख रहे थे तब वह नर्वस हो गये जिसके कारण उनका  प्रदर्शन इतना अच्छा नहीं था परन्तु उनके भाई जानते थे की सचिन नर्वस होने के कारण इतना अच्छा नहीं  खेल पा रहा हैं इसलिए उनके भाई ने ये सारी बातें रमाकांत को बताई फिर उन्होंने एक वृक्ष के पीछे से देखा अब सचिन ने बहुत अच्छा प्रदर्शन दिया और आर्चरेकर उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए सहमत हो गए  उनके कोच उनसे बहुत प्रभावित रहने लगे और उन्होंने सचिन की आगे की पढाई के लिए उन्हें श्रद्धा आश्रम विद्यामंदिर में भेजा


                             इस स्कूल में सचिन ने एडमिशन लिया और क्रिकेट के बारे में बहुत कुछ सीखा और जाना वे टीम के साथ खेलते और सायं काल में आचरेकर की देख रेख में क्रिकेट सीखते रहे अपने अभ्यास सत्र के दौरान जब वह खेलते तब उनके कोच स्टंप पर सिक्का रखते और कहते की जो भी इस सिक्के को बोलिंग कर गिरा देगा यह सिक्का उसका हो जायेगा नहीं तो यह सचिन का होगा सचिन कहते हैं की उन सिक्को से एक अलग सी ऊर्जा आ जाती थी उन्होंने ने आज भी उन सिक्को में से 13 सिक्के संभल कर रखे हैं 

                       सचिन ने अपने स्कूल के लिए मैच खेला और समय बीतने के साथ साथ वह मुंबई के प्रसिद्ध क्लबों के लिए भी मैच खेलना शुरू कर दिया।
                सचिन को शुरू में गेंदबाजी में अधिक दिलचस्पी थी लेकिन बाद में जब वह चौदह वर्ष  की आयु में मर्फ मद्रास में जाते हैं तो उन्हें  ऑस्ट्रेलिआ के कोच  सलाह देते हैं की तुम बल्लेबाजी में अच्छे हो और तुम्हे उसी पर अधिक ध्यान देना चाहिए। और तुम्हे उसी  में अपना  करियर भी बनाना चाहिए  

कुछ समय के बाद सर्वश्रेष्ठ जूनियर क्रिकेट पुरस्कार का वितरण  होना था  उन्हें पूरा विश्वास था की उन्हें यह पुरस्कार बड़ी आसानी  से मिल जायेगा परन्तु वह उसे नहीं जित पाए जिस कारण वह बहुत हताश थे यह  सब देख  उस समय सुनील गावस्कर जो की भारतीय टीम के खिलाडी थे उन्होंने अपना पैड  देकर सचिन को खेलने के लिए प्रेरित किया 

14 नवंबर 1987 को, उन्हें मुंबई में रणजी ट्रॉफी घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए खेलने के लिए चुना गया , लेकिन वह नहीं खेल पाए  और केवल प्रतिस्थापन क्षेत्ररक्षक में उपयोग किये गए।


कैरियर: -

सचिन तेंदुलकर की जीवनी: जीवन, बचपन, कैरियर, रिकॉर्ड और पदक
सचिन तेंदुलकर की जीवनी
                         सोलह वर्ष  की आयु में उन्हें भारतीय टीम के लिए खेलने के लिए चुना गया उनका चयन श्रेय श्री राज सिंह डूंगरपुर को दिया जाता है 
उन्होंने अपना पहला मैच कराची में पाकिस्तान के खिलफ खेला। और इसमें उन्होंने १५ रन बनाये एक बहुत प्रसिद्ध और प्रेरित करने वाली घटना इस मैच के दौरान हुई जब पाकिस्तान के गेंदबाज़ गेंद डाल रहे थे तब गेंद इनकी नाक पर आकर लगी और खून से लहू लुहान होने के बावजूद इन्होने ने अपने साहस को नहीं छोड़ा और बोले की मैं खेलूंगा और इस मैच में उन्होंने ५४ रन बनाये

1992-93 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला घरेलू टेस्ट मैच खेला। तेंदुलकर का प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बहुत अच्छा था, उन्होंने क्रिकेट को नए सिद्धांत दिए और क्रिकेट के इतिहास को बदल दिया और बहुत ही कम उम्र में उच्च स्थान हासिल किया और अटूट रिकॉर्ड बनाए और कई रिकॉर्ड बनाए जो सबसे पहले उनके द्वारा बनाए गए थे जैसे वह पहले खिलाड़ी थे जिन्होंने क्रिकेट इतिहास में 200 रन बनाए थे


  रिकार्ड: -

                             अपने क्रिकेट करियर में, सचिन ने कई रिकॉर्ड बनाए और कई पदक जीते।



सचिन तेंदुलकर की जीवनी: जीवन, बचपन, कैरियर, रिकॉर्ड और पदक
सचिन तेंदुलकर की जीवनी

  • इंटरनेशनल क्रिकेट करियर में सचिन के नाम 100 शतकों का विश्व रिकॉर्ड हैं । उनके पास टेस्ट शतक और 49 एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शतक हैं।
  • वह पहले खिलाड़ी थे जिन्होंने दोहरा शतक बनाया था।
  • उन्होंने  सबसे अधिक एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेला  हैं।
  • उनके पास 19 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड हैं।
  • वह पहले खिलाड़ी थे जिन्होंने अपने पहले मैच में शतक बनाया था।





पदक: -

सचिन तेंदुलकर की जीवनी: जीवन, बचपन, कैरियर, रिकॉर्ड और पदक
सचिन तेंदुलकर की जीवनी

  •                  1997-98 में उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • 1999 में सचिन को पदम श्री अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
  • 2008 में उन्हें पदम विभूषण से सम्मानित किया गया।
  • 2013 में भारतीय डाकघर ने सचिन तेंदुलकर के नाम पर डाक टिकट जारी किया।
  • 2014 में वह पहले भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी थे जिन्हें भारत गणराज्य के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • 23 दिसंबर 2012 को, उन्होंने एक दिवसीय क्रिकेट मैच से अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा की।
  • और 6 नवंबर, 2013 को वानखेड़े स्टेडियम में अपने घरेलू मैदान पर, उन्होंने अपना आखिरी मैच खेला और क्रिकेट से संन्यास ले लिया।



तो यह सचिन तेंदुलकर का जीवन है अगर आपके पास कोई प्रश्न है तो हमसे संपर्क करें या नीचे टिप्पणी करें।






अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहाँ पर क्लिक करें 

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